भारत की नई शिक्षा नीति 2022 की सम्पूर्ण जानकारी || New education Policy 2022 in Hindi

भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है स्कूली और कॉलेज शिक्षा के लिए अब 34 वर्षों के बाद भारत में नई शिक्षा नीति की घोषणा की गई है, यह भारत में आया बहुत बड़ा बदलाव है। भारत की यह नई शिक्षा नीति इसरो प्रमुख डॉ कस्तूरीरंजन की अध्यक्षता में की गई है 

जब किसी देश में कोई बड़ा बदलाव करना हो तो सबसे पहले उसकी शिक्षा नीति को बदलना चाहिए। आज इसकी शुरुआत हो गई, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने National Education Policy (NEP)  की घोषणा की है। इससे छात्रों उनके परिवार और उनके माता-पिता के जीवन में अब क्या क्या बदलाव आने वाले हैं। अगर आप छात्र हैं या किसी छात्र के माता-पिता हैं तो आपको यहाँ सारी जानकारियां पुरे विश्लेषण के साथ मिलेगी।   

New education Policy 2022 in Hindi



अब तक भारत की शिक्षा व्यवस्था कैसे चलती थी वो आपको पता है लेकिन अब इसे 5+3+3+4 फॉर्मेट में बदल दिया गया है जिसके तहत 12 साल की स्कूली शिक्षा दी जाएगी साथ ही 3 साल की प्री स्कूली शिक्षा को भी शामिल किया गया है ।  जिसे धीरे धीरे 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% लागू कर दिया जायेगा। 

New Education Policy 2022 के अंतर्गत Medical और Law की पढ़ाई को शामिल नहीं किया गया है।  

स्कूल की पढ़ाई फाउंडेशन स्टेज 

फाउंडेशन स्टेज :- इस दौरान छात्रों के लिए मजबूत नींव तैयार की जाएगी जिसका सलेबस NCRT द्वारा तैयार किया जाएगा और इसमें 3 वर्ष और पहली और दूसरी कक्षा को प्रथम 3 साल में से 2 साल खेलकूद गतिविधियां कराई जाएगी इन कक्षाओं के छात्रों के लिए किताबों का बोझ इतना नहीं होगा इसलिए हम कहेंगे कि छोटे बच्चे आ जाएंगे और अपनी यात्रा को आरंभ करेंगे बहुत किस्मत वाले होंगे 


प्रीप्रेटरी स्टेज: तीसरी कक्षा से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई के दौरान छात्रों को भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा इसके तहत छात्रों का परिचय विज्ञान गणित सामाजिक विज्ञान और संख्यात्मक कौशल से करवाया जाएगा। 

मिडिल स्टेज:  कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के छात्र शामिल होंगे इसमें छात्रों को पढ़ाया जाएगा।  इसमें छात्र अपनी रूचि के अनुसार इंटर्नशिप कर सकेंगे।  छठी कक्षा से व्यवसायिक प्रशिक्षण इंटर्नशिप को भी आरंभ कर दिया जाएगा। छठी कक्षा से ही कंप्यूटर और एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी जाएगी साथ ही उन्हें कोडिंग ही सिखाई जाएगी।

सेकेंडरी स्टेज:  सेकेंडरी स्टेज के तहत कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के बच्चों को शामिल किया गया है।  सेकेंडरी स्टेज के तहत जैसे बच्चे पहले साइंस कॉमर्स तथा आर्ट्स लेते थे इस सुविधा को खत्म कर दी गई है , सेकेंडरी स्टेज के तहत बच्चे अपने पसंद की सब्जेक्ट ले सकेंगे और आगे की पढ़ाई कर सकेंगे ।


अंग्रेजी में पढ़ाई की अनिवार्यता समाप्त कर छात्र मात्र भाषा में पढ़ाई कर पाएंगे उदाहरण के लिए अगर आप पांचवी कक्षा तक अपने बच्चे को मराठी संस्कृत या गुजराती भाषा में पढ़ाना चाहते हैं, तो अब आप ऐसा कर पाएंगे। अंग्रेजी सिर्फ एक विषय के तौर पर आपको पढ़ाई जाएगी स्कूलों का जबरदस्ती अंग्रेजी करण का दौर अब समाप्त हो जाएगा।  

छठी कक्षा में पहुंचने के बाद छात्रों को कंप्यूटर कोडिंग सीखने का मौका मिलेगा।  भारत के छात्र चीन जैसे देशों की तर्ज पर छोटी उम्र में ही मोबाइल फोन एप्लीकेशन बनाने की तकनीक सिख पाएंगे।  

छठी कक्षा से ही छात्रों को इंटर्नशिप का भी मौका मिलेगा।  इससे किसी छात्र की किसी खास विषय में रुचि है और उसकी प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करना चाहता है तो वह इससे जुड़ी इंटर्नशिप भी कर सकता है। उदाहरण के लिए अगर आपका बच्चा पेंटिंग करने का शौक रखता है तो वह किसी के पास जा सकता है। अगर आपके बच्चे को सॉफ्टवेयर कंपनी में अब अपने स्कूल के दौरान इंटर्नशिप कर सकता है 

12वीं कक्षा की परीक्षाएं साल में दो बार यानी हर 6 महीने पर एक परीक्षा होगी और दोनों को जोड़कर आपकी फाइनल मार्कशीट तैयार की जाएगी। एक छात्र के तौर पर आपको पूरे साल पढ़ाई करनी होगी और आप यह कह कर बच नहीं सकेंगे कि आप सिर्फ फाइनल एग्जाम की तैयारी करना चाहते हैं। इससे पहले आपने देखा होगा बहुत सारे छात्र ऐसे होते हैं जो साल के आखिर में एक-दो महीने पढ़ाई कर लेते हैं और फिर उसके आधार पर वह फाइनल परीक्षा दे देते थे।  

अब आपको पूरे साल पढ़ाई करनी पड़ेगी बोर्ड की परीक्षाओं को आसान बनाया जाएगा और इसमें छात्रों की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। 

कोचिंग क्लास की आदत को समाप्त कर दिया जाएगा बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को अब उनकी पसंद की भाषा में परीक्षा लिखने की पूरी छूट होगी उदाहरण के लिए अगर आप चाहें तो हिंदी अंग्रेजी में से किसी एक भाषा में अपनी परीक्षा दे सकते हैं। 

छात्रों के रिपोर्ट कार्ड को भी अब पहले की तरह तैयार नहीं किया जाएगा किसी छात्र को फाइनल मार्क्स देते समय उसके व्यवहार एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में उसके प्रदर्शन और उसके मानसिक क्षमताओं का भी ध्यान रखा जाएगा इसके अलावा रिपोर्ट को  इस आधार पर तैयार किया जाएगा जिसमे छात्र खुद को भी अंक देंगे अपना खुद का भी विश्लेषण करेंगे पढ़ाने वाले शिक्षक भी छात्र को अंक देंगे। 

कॉलेज स्तर पर क्या क्या बदलाव हुए 

अगर 12वीं कक्षा के बोर्ड एग्जाम में आपके नंबर इतने नहीं आए हैं कि आपको कट ऑफ परसेंटेज के आधार पर सीधे किसी कॉलेज में एडमिशन मिल पाए तो कॉमन एप्टिट्यूड टेस्ट भी दे सकते हैं और फिर इस टेस्ट में आप के प्रदर्शन को आपके बारहवीं कक्षा के नंबरों के साथ जोड़ दिया जाएगा और उस आधार पर आपको आपके मनपसंद कॉलेज में एडमिशन मिल पाएगा 

ग्रेजुएशन की पढ़ाई को तीन और चार वर्षो के कोर्स ड्यूरेशन में बांट दिया जाएगा।  अभी तक अगर आप कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे तो आपको ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं मिलती थी, लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अगर आप 1 साल के बाद कॉलेज छोड़ देते हैं तो आपको सर्टिफिकेट दिया जाएगा।  

अगर आपने कॉलेज का फर्स्ट ईयर कंप्लीट कर लिया और उसके बाद पढ़ाई छोड़ दी तो आपको सर्टिफिकेट कोर्स सर्टिफिकेट मिलेगा इसी तरह अगर आप 2 साल के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं तो आपको डिप्लोमा दिया जाएगा और अगर आप 3 साल की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो आपको डिग्री दी जाएगी और अगर आप 4 साल का कोर्स करके बैचलर्स डिग्री लेना चाहते हैं तो आपको रिसर्च के सर्टिफिकेट के साथ डिग्री मिलेगी।  

स्कूल के छात्रों की तरह कॉलेज के छात्र भी एक साथ कई अलग अलग स्ट्रीम के विषयों में पढाई कर पाएंगे।  जिस कोर्स को आप जहां तक कंप्लीट करेंगे उसके अंक इस क्रेडिट बैंक में जमा हो जाएंगे और फिर जब आप फाइनल डिग्री के लिए कोई कोर्स करेंगे तो उस क्रेडिट को इसमें जोड़ दिया जाएगा यह पूरी व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल होगी।